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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 47, कुल 504 में से

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पृष्ठ 47

श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2
दादू नीकी बरियां आय कर, राम जप लीन्हां ।
आत्म साधन सोधि कर, कारज भल कीन्हां ।। 57 ।।
दादू अगम वस्तु पानैं पड़ी, राखि मंझि छिपाइ ।
छिन छिन सोई संभालिए, मत वै बीसर जाइ ।। 58 ।।
स्मरण नाम महिमा माहात्म्य
दादू उज्जवल निर्मला, हरि रंग राता होइ ।
काहे दादू पचि मरै, पानी सेती धोइ ।। 59 ।।
शरीर सरोवर राम जल, माहीं संजम सार ।
दादू सहजैं सब गए, मन के मैल विकार ।। 60 ।।
दादू रामनाम जलं कृत्वां, स्नानं सदा जितः।
तन मन आत्म निर्मलं, पंच-भू पापं गतः ।। 61 ।।
दादू उत्तम इन्द्री निग्रहं, मुच्यते माया मनः।
परम पुरुष पुरातनं, चिंतते सदा तन ।। 62 ।।
दादू सब जग विष भय्या, निर्विष बिरला कोइ ।
सोई निर्विष होइगा, जाके नाम निरंजन होइ ।। 63 ।।
दादू निर्विष नाम सौं, तन मन सहजैं होइ ।
राम निरोगा करेगा, दूजा नांही कोइ ।। 64 ।।
ब्रह्म भक्ति जब उपजै, तब माया भक्ति बिलाइ ।
दादू निर्मल मल गया, ज्यूँ रवि तिमिर नसाइ ।। 65 ।।
मनहर भाँवरि
दादू विषय विकार सौं, जब लग मन राता ।
तब लग चित्त न आवई, त्रिभुवनपति दाता ।। 66 ।।
विरह जिज्ञासा
दादू क्या जाणों कब होइगा, हरि सुमिरण इक तार ।
क्या जाणों कब छाड़ि है, यहु मन विषै विकार ।। 67 ।।

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