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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 46, कुल 504 में से

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पृष्ठ 46

श्री दादूवाणी-स्मरण का अंग 2
मन परमोध
दादू राम कहे सब रहत है, नखसिख सकल सरीर।
राम कहे बिन जात है, समझि मनवां वीर ॥ 47 ॥
दादू राम कहै सब रहत है, लाहा मूल सहेत ।
राम कहे बिन जात है, मूरख मनवां चेत ॥ 48 ॥
दादू राम कहे सब रहत है, आदि अंति लौं सोइ।
राम कहे बिन जात है, यहु मन बहुरि न होइ ॥ 49 ॥
दादू राम कहे सब रहत है, जीव ब्रह्म की लार ।
राम कहे बिन जात है, रे मन हो होशियार ॥ 50 ॥
परमार्थी
हरि भज साफिल जीवना, पर उपकार समाइ।
दादू मरणा तहाँ भला, जहाँ पशु पंखी खाइ ॥ 51 ॥
स्मरण
दादू राम शब्द मुख ले रहै, पीछे लगा जाइ।
मनसा वाचा कर्मना, तिहि तत सहज समाइ ॥ 52 ॥
अब 'तिही तत्त' में समाने की विधि का वर्णन
दादू रचि मचि लागे नाम सौं, राते माते होइ।
देखेंगे दीदार को, सुख पावेंगे सोइ ॥ 53 ॥
चेतावनी
दादू सांई सेवैं सब भले, बुरा न कहिये कोइ ।
सारों मांही सो बुरा, जिस घटि नाम न होइ ॥ 54 ॥
ईश्वर विमुख प्राणी की दुर्गति
दादू जियरा राम बिन, दुखिया इहि संसार ।
उपजै विनसै खप मरै, सुख दुख बारम्बार ॥ 55 ॥
स्मरण नाम महिमा माहात्मय
राम नाम रुचि उपजै, लेवे हित चित लाइ।
दादू सोई जीयरा, काहे जमपुरि जाइ ॥ 56 ॥

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