सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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राग
बसंत
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अथ राग बसंत २४
(गायन समय प्रभात ३ से ६ तथा बसंत ऋतु)
३६४. भजन भेद । मल्लिका मोद ताल
निर्मल ना मन लीयो जाइ, जाके भाग बड़े सोई फल खाइ ॥ टेक ॥
मन माया मोह मद माते, कर्म कठिन ता मांहि परे ।
विषय विकार मान मन मांही, सकल मनोरथ स्वाद खरे ॥ १ ॥
काम क्रोध ये काल कल्पना, मैं मैं मेरी अति अहंकार ।
तृष्णा तृप्ति न मानै कबहूँ, सदा कुसंगी पाँच विकार ॥ २ ॥
अनेक जोध रहैं रखवाले, दुर्लभ दूर फल अगम अपार ।
जाके भाग बड़े सोई फल पावै, दादू दाता सिरजनहार ॥ ३ ॥
३६५. (गुजराती) विरह । धीमी ताल
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