सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 456, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 456

राग सूहा
अथ राग सूहा २२
(गायन समय दिन 9 से 12) 354. विनती । एक ताल
तुम बिच अंतर जनि परै, माधव ! भावै तन धन लेहु ।
भावै स्वर्ग नरक रसातल, भावै करवत देहु ॥ टेक ॥
भावै विपति देहु दुख संकट, भावै संपति सुख शरीर ।
भावै घर वन राव रंक कर, भावै सागर तीर, माधव ॥ 1 ॥
भावै बँध मुक्त कर, माधव ! भावै त्रिभुवन सार ।
भावै सकल दोष धर माधव, भावै सकल निवार, माधव ॥ 2 ॥
भावै धरणि गगन धर, माधव ! भावै शीतल सूर ।
दादू निकटि सदा संग, माधव ! तूँ जनि होवै दूर, माधव ॥ 3 ॥

  • 456 -