सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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राग बिलावल
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अथ राग बिलावल २१
(गायन समय प्रातः 6 से 9)
३३३. परिचय विनती । त्रिताल
दया तुम्हारी दर्शन पड्ये ।
जानत हो तुम अंतरजामी, जानराय तुम सौं कहा कहिये ॥ टेक ॥
तुम सौं कहा चतुराई कीजै, कौण कर्म कर तुम पाये ।
को नहीं मिले प्राण बल अपने, दया तुम्हारी तुम आये ॥ 1 ॥
कहा हमारो आन तुम आगे, कौन कला कर वश किये ।
जीते कौन बुद्धि बल पौरुष, रुचि अपनी तैं सरण लिये ॥ 2 ॥
तुम ही आदि अंत पुनि तुम ही, तुम कर्ता त्रय लोक मंझार ।
कुछ नांही तैं कहा होत है, दादू बलि पावे दीदार ॥ 3 ॥
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