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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 446, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-राग गुंड(गौंड) 20
३३१. विरह विनती । शूलताल
देहुजी, देहुजी, प्रेम पियाला देहुजी, देकर बहुरि न लेहुजी ॥ टेक ॥
ज्यों-ज्यों नूर न देखूं तेरा, त्यों-त्यों जियरा तलफै मेरा ॥ 1 ॥
अमी महारस नाम न आवै, त्यों-त्यों प्राण बहुत दुख पावै ॥ 2 ॥
प्रेम भक्ति रस पावै नाँहीं, त्यों-त्यों सालै मन ही मांहीं ॥ 3 ॥
सेज सुहाग सदा सुख दीजे, दादू दुखिया विलम्ब न कीजे ॥ 4 ॥
३३२. परिचय विनती । त्रिताल
वर्षहु राम अमृतधारा, झिलमिल झिलमिल सींचनहारा ॥ टेक ॥
प्राण बेलि निज नीर न पावै, जलहर बिना कमल कुम्हलावै ॥ 1 ॥
सूखे बेली सकल बनराय, राम देव जल वर्षहु आय ॥ 2 ॥
आतम बेली मरै पियास, नीर न पावै दादूदास ॥ 3 ॥
इति राग गुंड सम्पूर्ण: ॥ 20 ॥ पद 20 ॥

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