सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
पृष्ठ 438, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंपृष्ठ 438
अथ राग गुंड (गौंड) २०
(गायन समय वर्षा ऋतु में सब समय, संगीत प्रकाश के मतानुसार)
३12. भक्ति निष्काम । सुरफाख्ता ताल
दर्शन दे राम ! दर्शन दे, हौं तो तेरी मुक्ति न माँगूं रे ।। टेक ।।
सिद्धि न माँगूं, रिद्धि न माँगूं, तुम्ह ही माँगूं, गोविन्दा ।। 1 ।।
जोग न माँगूं, भोग न माँगूं, तुम्ह ही माँगूं, रामजी ।। 2 ।।
घर नहीं माँगूं, वन नहीं माँगूं, तुम्ह ही माँगूं, देवजी ।। 3 ।।
दादू तुम बिन और न माँगूं, दर्शन माँगूं देहुजी ।। 4 ।।
३1३. विरह विनती । सुरफाख्ता ताल
तूँ आपैं ही विचार, तुझ बिन क्यों रहूँ ?
मेरे और न दूजा कोइ, दुःख किसको कहूँ ।। टेक ।।
- 438 -