सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग सोरठ 19
जा कारण बहु फिरिये, कर तीरथ भ्रमि भ्रमि मरिये ।
सहजैं ही सो चीन्हा, हरि चीन्ह सबै सुख लीन्हा ॥ 3 ॥
प्रेम भक्ति जिन जानी, सो काहे भरमै प्राणी ।
हरि सहजैं ही भल मानैं, तातैं दादू और न जानैं ॥ 4 ॥
३०९. परिचय विनती । वर्ण भिन्न ताल
राम जी जनि भरमावो हम को, तातैं करूं विनती तुमको ॥ टेक ॥
चरण तुम्हारे सब ही देखूं, तप तीरथ व्रत दाना ।
गंग जमुन पास पाइन के, तहाँ देहु अस्नाना ॥ 1 ॥
संग तुम्हारे सब ही लागे, योग यज्ञ जे कीजे ।
साधन सकल येही सब मेरे, संग आपनो दीजैं ॥ 2 ॥
पूजा पाती देवी देवल, सब देखूं तुम मांहिं ।
मोको ओट आपणी दीजे, चरण कवल की छांहीं ॥ 3 ॥
ये अरदास दास की सुनिये, दूर करो भ्रम मेरा ।
दादू तुम बिन और न जानै, राखो चरणों नेरा ॥ 4 ॥
३१०. उपास्य परिचय । वर्ण भिन्न ताल
सोई देव पूजूं, जे टांची नहिं घड़िया, गर्भवास नहीं औतरिया ॥ टेक ॥
बिन जल संजम सदा सोइ देवा, भाव भक्ति करूं हरि सेवा ॥ 1 ॥
पाती प्राण हरि देव चढ़ाऊँ, सहज समाधि प्रेम ल्यौ लाऊँ ॥ 2 ॥
इहि विधि सेवा सदा तहँ होई, अलख निरंजन लखै न कोई ॥ 3 ॥
ये पूजा मेरे मन मानै, जिहि विधि होइ सु दादू न जानै ॥ 4 ॥
३११. परिचय हैरान । खेमटा ताल
राम राइ ! मोको अचरज आवै, तेरा पार न कोई पावै ॥ टेक ॥
ब्रह्मादिक सनकादिक नारद, नेति नेति जे गावै ।
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