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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 419, कुल 504 में से

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श्री दादूवाणी-राग टोडी(तोडी) 16
सकल शिरोमणि नाँव रे, मै बलिहारी जाँव रे ॥ टेक ॥
दुस्तर तारै, पार उतारै, नरक निवारै नाँव रे ॥ 1 ॥
तारणहारा, भवजल पारा, निरमल सारा नाँव रे ॥ 2 ॥
नूर दिखावै, तेज मिलावै, ज्योति जगावै नाँव रे ॥ 3 ॥
सब कुछ दाता, अमृत राता, दादू माता नाँव रे ॥ 4 ॥
271. केवल विनती । राज विद्याधर ताल
राइ रे राइ रे, सकल भुवनपति राइ रे,
अमृत देहु अघाइ रे राइ ॥ टेक ॥
प्रगट राता, प्रगट माता, प्रगट नूर दिखाइ रेराइ ॥ 1 ॥
सुस्थिर ज्ञाना, सुस्थिर ध्याना, सुस्थिर तेज मिलाइ रेराइ ॥ 2 ॥
अविचल मेला, अविचल खेला, अविचल ज्योति समाइ रे राइ ॥ 3 ॥
निहचल बैना, निहचल नैना, दादू बलि बलि जाइ रे राइ ॥ 4 ॥
272. रसिक अवस्था । सवारी ताल
हरि रस माते मगन भये ।
सुमिर सुमिर भये मतवाले, जामण मरण सब भूल गये ॥ टेक ॥
निर्मल भक्ति प्रेम रस पीवैं, आन न दूजा भाव धरैं ।
सहजैं सदा राम रंग राते, मुक्ति वैकुंठैं कहा करैं ॥ 1 ॥
गाइ गाइ रस लीन भये हैं, कछू न मांगैं संत जना ।
और अनेक देहु दत्त आगै, आन न भावै राम बिना ॥ 2 ॥
इक टग ध्यान रहैं ल्यौ लागे, छाकि परे हरि रस पीवैं ।
दादू मगन रहैं रस माते, ऐसे हरि के जन जीवैं ॥ 3 ॥
273. (गुजराती) केवल विनती । सवारी ताल
ते मैं कीधेला राम ! जे तैं वाज्या ते ।

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