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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

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पृष्ठ 407

श्री दादूवाणी-राग सिन्दूरा 10
दीपक दृष्टि पतंग ज्यों, यों भ्रमि जले जनि कोई रे ॥ 1 ॥
जिह्वा स्वारथ आपने, ज्यूं मीन मरे तज नीरो रे।
मांहैं जाल न जाणियो, तातैं उपनों दुःख शरीरो रे ॥ 2 ॥
स्वादैं ही संकट पर्यो देखत ही नर अंधो रे।
मूरख मूठी छाड़ि दे, होइ रह्यो निर्बंधो रे ॥ 3 ॥
मान सिखावणि माहरी, तू हरि भज मूल न हारी रे।
सुख सागर सोई सेविये, जन दादू राम सँभारी रे ॥ 4 ॥
इति राग सिन्दूरा सम्पूर्ण ॥ 10 ॥ पद 8 ॥

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