सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 369, कुल 504 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 369

श्री दादूवाणी-राग मारू 7
160. उदीक्षण । ताल
मन बावरे हो, अनत जनि जाइ,
तो तूँ जीवै अमीरस पीवै, अमर फल काहे न खाइ ॥ टेक ॥
रहु चरण शरण सुख पावै, देखहु नैन अघाइ।
भाग तेरे पीव नेरे, थीर थान बताइ ॥ 1 ॥
संग तेरे रहै घेरे, सहजैं अंग समाइ।
शरीर मांही शोध सांई, अनहद ध्यान लगाइ ॥ 2 ॥
पीव पास आवै सुख पावै, तन की तप्त बुझाइ।
दादू रे जहाँ नाद ऊपजै, पीव पास दिखाइ ॥ 3 ॥
161. भ्रम विध्वंसन । उदीक्षण ताल
निरंजन अंजन कीन्हा रे, सब आतम लीन्हा रे ॥ टेक ॥
अंजन माया अंजन काया, अंजन छाया रे ।
अंजन राते अंजन माते, अंजन पाया रे ॥ 1 ॥
अंजन मेरा अंजन तेरा, अंजन मेला रे ।
अंजन लीया अंजन दीया, अंजन खेला रे ॥ 2 ॥
अंजन देवा अंजन सेवा, अंजन पूजा रे ।
अंजन ज्ञाना अंजन ध्याना, अंजन दूजा रे ॥ 3 ॥
अंजन वक्ता अंजन श्रोता, अंजन भावै रे ।
अंजन राम निरंजन कीन्हा, दादू गावै रे ॥ 4 ॥
162. निज वचन । महिमा चौताल ध्रुपद में
ऐन बैन चैन होवै, सुणतां सुख लागै रे ।
तीन गुण त्रिविधि तिमिर, भरम करम भागै रे ॥ टेक ॥
होइ प्रकास अति उजास, परम तत्व सूझै ।
परम सार निर्विकार, विरला कोई बूझै ॥ 1 ॥

  • 369 -