सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग मारू 7
144. झपताल
मना, जप राम नाम कहिये ।
राम नाम मन विश्राम, संगी सो गहिये ॥ टेक॥
जाग जाग सोवे कहा, काल कंध तेरे ।
बारम्बार कर पुकार, आवत दिन नेरे ॥ 1 ॥
सोवत सोवत जन्म बीते, अजहूँ न जीव जागे ।
राम सँभार नींद निवार, जन्म जुरा लागे ॥ 2 ॥
आस पास भरम बँध्यो, नारी गृह मेरा ।
अंत काल छाड़ चल्यो, कोई नहिं तेरा ॥ 3 ॥
तज काम क्रोध मोह माया, राम राम करणा ।
जब लग जीव प्राण पिंड, दादू गहि शरणा ॥ 4 ॥
145. विरह । अङ्गुताल
क्यों विसरै मेरा पीव पियारा, जीव की जीवन प्राण हमारा ॥ टेक॥
क्यों कर जीवै मीन जल बिछुरै, तुम्ह बिन प्राण सनेही ।
चिन्तामणि जब कर तैं छूटै, तब दुख पावै देही ॥ 1 ॥
माता बालक दूध न देवै, सो कैसे कर पीवै ।
निर्धन का धन अनत भुलाना, सो कैसे कर जीवै ॥ 2 ॥
बरषहु राम सदा सुख अमृत, नीझर निर्मल धारा ।
प्रेम पियाला भर भर दीजे, दादू दास तुम्हारा ॥ 3 ॥
146. अत्यन्त विरह (गुजराती भाषा) । अङ्गुताल
कोई कहो रे मारा नाथ ने, नारी नैण निहारे बाट रे ॥ टेक॥
दीन दुखिया सुन्दरी, करुणा वचन कहे रे ।
तुम बिन नाह विरहणी व्याकुल, केम कर नाथ रहे रे ॥ 1 ॥
भूधर बिन भावे नहिं कोई, हरि बिन और न जाणे रे ।
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