सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1
दादू पंच स्वादी पंच दिशि, पंचे पंचों बाट।
तब लग कह्या न कीजिये, गहि गुरु दिखाया घाट ॥ 100 ॥
दादू पंचों एक मत, पंचों पूज्या साथ।
पंचों मिल सन्मुख भये, तब पंचों गुरु की बाट ॥ 101 ॥
सतगुरु विमुख ज्ञान
दादू ताता लोहा तिणैं सौं, क्यूं कर पकड़या जाइ।
गहन गति सूझै नहीं, गुरु नहीं बूझै आइ ॥ 102 ॥
गुरुमुख कसौटी
दादू औगुण गुण कर माने गुरु के, सोई शिष्य सुजाण।
सतगुरु औगुण क्यों करै, समझै सोई सयाण ॥ 103 ॥
सोने सेती बैर क्या, मारे घण के घाइ।
दादू काटि कलंक सब, राखै कंठ लगाइ ॥ 104 ॥
पाणी माहैं राखिये, कनक कलंक न जाहि।
दादू गुरु के ज्ञान सौं, ताइ अगनि में बाहि ॥ 105 ॥
दादू माहैं मीठा हेत करि, ऊपर कड़वा राख।
सतगुरु सिष कौं सीख दे, सब साधों की साख ॥ 106 ॥
दादू कहै, सिष भरोसे आपणै, ह्वै बोली हुसियार।
कहेगा सो बहेगा, हम पहली करैं पुकार ॥ 107 ॥
दादू सतगुरु कहै सो कीजिये, जे तूं सिष सुजाण।
जहाँ लाया तहँ लागि रहु, बुझे कहा अजाण ॥ 108 ॥
गुरु पहली मन सौं कहै, पीछे नैन की सैन।
दादू सिष समझै नहीं, कहि समझावै बैन ॥ 109 ॥
कहै लखै सो मानवी, सैन लखै सो साध।
मन लखै सो देवता, दादू अगम अगाध ॥ 110 ॥
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