सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1
हरि जल नीर निकट जब आया, तब बूँद बूँद मिल सहज समाया ॥ 3 ॥
नाना भेद भ्रम सब भागा, तब दादू एक रंगै रंग लागा ॥ 4 ॥
65. वर्ण भिन्न ताल
अलह राम छूटा भ्रम मोरा ।
हिंदू तुरक भेद कछु नांही, देखूं दर्शन तोरा ॥ टेक ॥
सोई प्राण पिंड पुनि सोई, सोई लोही मांसा ।
सोई नैन नासिका सोई, सहजैं कीन्ह तमासा ॥ 1 ॥
श्रवणों शब्द बाजता सुणिये, जिह्वा मीठा लागै ।
सोई भूख सबन को व्यापै, एक जुगति सोई जागै ॥ 2 ॥
सोई संधि बंध पुनि सोई, सोई सुख सोई पीरा ।
सोई हस्त पाँव पुनि सोई, सोई एक शरीरा ॥ 3 ॥
यहु सब खेल खालिक हरि तेरा, तैं ही एक कर लीना ।
दादू जुगति जान कर ऐसी, तब यहु प्राण पतीना ॥ 4 ॥
66. नटताल
भाई रे ऐसा पंथ हमारा,
द्वै पख रहित पंथ गह पूरा,अवरण एक अधारा ॥ टेक ॥
वाद-विवाद काहू सौं नांहीं, माहीं जगत तैं न्यारा ।
सम दृष्टि स्वभाव सहज में, आप ही आप विचारा ॥ 1 ॥
मैं तैं मेरी यहु मति नाहीं, निर्वैरी निरकारा ।
पूरण सबै देख आपा पर, निरालंब निरधारा ॥ 2 ॥
काहु के संग मोह न ममता, संगी सिरजनहारा ।
मनही मन सौं समझ सयाना, आनन्द एक अपारा ॥ 3 ॥
काम कल्पना कदे न कीजे, पूरण ब्रह्म पियारा ।
इहि पथ पहुँच पार गह दादू, सो तत सहज संभारा ॥ 4 ॥
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