सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1
55. प्रश्न । गजताल
कौण शब्द कौण परखणहार, कौण सुरति कहु कौण विचार ॥ टेक ॥
कौण सुज्ञाता कौण गियान, कौण उन्मनी कौण धियान ॥ 1 ॥
कौण सहज कहु कौण समाध, कौण भक्ति कहु कौण आराध ॥ 2 ॥
कौण जाप कहु कौण अभ्यास, कौण प्रेम कहु कौण पियास ॥ 3 ॥
सेवा कौण कहो गुरुदेव, दादू पूछे अलख अभेव ॥ 4 ॥
उत्तर की साखी
कौण शब्द ? दादू शब्द अनाहद हम सुन्या, नख शिख सकल शरीर ।
सब घट हरि हरि होत है, सहजैं ही मन थीर ॥ 1 ॥
कौण परखणहार ? प्राण जौहरी पारिखू, मन खोटा ले आवै ।
खोटा मन के माथे मारै, दादू दूर उड़ावै ॥ 2 ॥
कौण सुरति ? दादू सहजैं सुरति समाइ ले, पारब्रह्म के अंग ।
अरस परस मिल एक है, सन्मुख रहिबा संग ॥ 3 ॥
कौण विचार ? सहज विचार सुख में रहै, दादू बड़ा विवेक।
मन इन्द्री पसरै नहीं, अंतर राखै एक ॥ 4 ॥
कौण सुज्ञाता ? दादू सो ही पंडित ज्ञाता, राम मिलण की बूझै ॥ 5 ॥
कौण गियान ? हंस गियानी सो भला, अंतर राखै एक।
विष में अमृत काढ ले, दादू बड़ा विवेक ॥ 6 ॥
कौण उन्मनी ? मन लवरू के पंख हैं, उनमनि चढ़ै आकाश ।
पग रहि पूरे सांच के, रोपि रह्या हरि पास ॥ 7 ॥
कौण धियान ? जहँ विरहा तहँ और क्या, सुधि बुधि नाठे ज्ञान ।
लोक वेद मारग तजे, दादू एकै ध्यान ॥ 8 ॥
कौण सहज ? सहज रूप मन का भया, जब द्वै द्वै मिटी तरंग ।
ताता सीला सम भया, तब दादू एकै अंग ॥ 9 ॥
कौण समाधि ? सहज शून्य मन राखिये, इन दोनों के मांहि ।
लै समाधि रस पीजिये, तहाँ काल भय नांहि ॥ 10 ॥
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