सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1
दादू गर्व न कीजिये, सन्मुख सिरजनहार ॥ 4 ॥
46. हित उपदेश । नट ताल
हुसियार रहो, मन मारैगा, साँई सतगुरु तारैगा ॥ टेक ॥
माया का सुख भावै, मूरख मन बौरावै रे ॥ 1 ॥
झूठ साच कर जाना, इन्द्रिय स्वाद भुलाना रे ॥ 2 ॥
दुख को सुख कर मानै, काल झाल नहीं जानै रे ॥ 3 ॥
दादू कह समझावै, यहु अवसर बहुरि न पावै रे ॥ 4 ॥
47. विश्वास । नटताल
साहिबजी सत मेरा रे, लोग झखैं बहुतेरा रे ॥ टेक ॥
जीव जन्म जब पाया, मस्तक लेख लिखाया रे ॥ 1 ॥
घटै बधै कुछ नांही, कर्म लिख्या उस माहीं रे ॥ 2 ॥
विधाता विधि कीन्हा, सिरज सबन को दीन्हा रे ॥ 3 ॥
समरथ सिरजनहारा, सो तेरे निकट गँवारा रे ॥ 4 ॥
सकल लोक फिर आवै, तो दादू दीया पावै रे ॥ 5 ॥
48. राज विधाधर ताल
पूर रह्या परमेश्वर मेरा, अणमांग्या देवै बहुतेरा ॥ टेक ॥
सिरजनहार सहज में देइ, तो काहे धाइ माँग जन लेइ ॥ 1 ॥
विश्वंभर सब जग को पूरै, उदर काज नर काहे झूरै ॥ 2 ॥
पूरक पूरा है गोपाल, सबकी चिंत करै दरहाल ॥ 3 ॥
समर्थ सोई है जगन्नाथ, दादू देख रहे संग साथ ॥ 4 ॥
49. नाम विश्वास । राज मृगांक ताल
राम धन खात न खूटै रे,
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