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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 320, कुल 504 में से

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पृष्ठ 320

श्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1


जागुहु रे जन तत्त न जाइ, जागत है सो रह्या समाइ ॥ 1 ॥
जतन जतन कर राखहु सार, तस्कर उपजै कौन विचार ॥ 2 ॥
इब कर दादू जाणैं जे, तो साहिब शरणागति ले ॥ 3 ॥

  1. उपदेश चेतावनी । पंचम ताल
    मेरी मेरी करत जग खीना, देखत ही चल जावै ।
    काम क्रोध तृष्णा तन जालै, तातैं पार न पावै ॥ टेक ॥
    मूरख ममता जन्म गमावै, भूल रहे इहिं बाजी ।
    बाजीगर को जानत नांही, जन्म गंवावै वादी ॥ 1 ॥
    प्रपंच पंच करै बहुतेरा, काल कुटुम्ब के तांई ।
    विषै के स्वाद सबै ये लागे, तातैं चीन्हत नांही ॥ 2 ॥
    येता जिय में जानत नांहीं, आइ कहाँ चल जावै ।
    आगे पीछे समझै नांहीं, मूरख यूं डहकावै ॥ 3 ॥
    ये सब भ्रम भान भल पावै, शोध लेहु सो साँई ।
    सोई एक तुम्हारा साजन, दादू दूसर नांही ॥ 4 ॥

  2. गर्व हानिकर । पंचम ताल
    गर्व न कीजिये रे, गर्वै होइ विनाश ।
    गर्वै गोविन्द ना मिलै, गर्वै नरक निवास ॥ टेक ॥
    गर्वै रसातल जाइये, गर्वै घोर अन्धार ।
    गर्वै भौ-जल डूबिये, गर्वै वार न पार ॥ 1 ॥
    गर्वै पार न पाइये, गर्वै जमपुर जाइ ।
    गर्वै को छूटै नहीं, गर्वै बँधे आइ ॥ 2 ॥
    गर्वै भाव न ऊपजै, गर्वै भक्ति न होइ ।
    गर्वै पिव क्यों पाइये, गर्वै करै जनि कोइ ॥ 3 ॥
    गर्वै बहुत विनाश है, गर्वै बहुत विकार।

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