सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1
जागुहु रे जन तत्त न जाइ, जागत है सो रह्या समाइ ॥ 1 ॥
जतन जतन कर राखहु सार, तस्कर उपजै कौन विचार ॥ 2 ॥
इब कर दादू जाणैं जे, तो साहिब शरणागति ले ॥ 3 ॥
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उपदेश चेतावनी । पंचम ताल
मेरी मेरी करत जग खीना, देखत ही चल जावै ।
काम क्रोध तृष्णा तन जालै, तातैं पार न पावै ॥ टेक ॥
मूरख ममता जन्म गमावै, भूल रहे इहिं बाजी ।
बाजीगर को जानत नांही, जन्म गंवावै वादी ॥ 1 ॥
प्रपंच पंच करै बहुतेरा, काल कुटुम्ब के तांई ।
विषै के स्वाद सबै ये लागे, तातैं चीन्हत नांही ॥ 2 ॥
येता जिय में जानत नांहीं, आइ कहाँ चल जावै ।
आगे पीछे समझै नांहीं, मूरख यूं डहकावै ॥ 3 ॥
ये सब भ्रम भान भल पावै, शोध लेहु सो साँई ।
सोई एक तुम्हारा साजन, दादू दूसर नांही ॥ 4 ॥ -
गर्व हानिकर । पंचम ताल
गर्व न कीजिये रे, गर्वै होइ विनाश ।
गर्वै गोविन्द ना मिलै, गर्वै नरक निवास ॥ टेक ॥
गर्वै रसातल जाइये, गर्वै घोर अन्धार ।
गर्वै भौ-जल डूबिये, गर्वै वार न पार ॥ 1 ॥
गर्वै पार न पाइये, गर्वै जमपुर जाइ ।
गर्वै को छूटै नहीं, गर्वै बँधे आइ ॥ 2 ॥
गर्वै भाव न ऊपजै, गर्वै भक्ति न होइ ।
गर्वै पिव क्यों पाइये, गर्वै करै जनि कोइ ॥ 3 ॥
गर्वै बहुत विनाश है, गर्वै बहुत विकार।
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