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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 318, कुल 504 में से

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पृष्ठ 318

श्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1

३९. परिचय वैराग्य । दादरा
इनमें क्या लीजे क्या दीजे, जन्म अमोलक छीजे ॥ टेक ॥
सोवत सुपिना होई, जागे थैं नहिं कोई ॥ 1 ॥
मृगतृष्णा जल जैसा, चेत देख जग ऐसा ॥ 2 ॥
बाजी भरम दिखावा, बाजीगर दहकावा ॥ 3 ॥
दादू संगी तेरा, कोई नहीं किस केरा ॥ 4 ॥
५०. चेतावनी उपदेश । सिंह लील ताल
खालिक जागे जियरा सोवे, क्यों कर मेला होवे ॥ टेक ॥
सेज एक नहिं मेला, तातैं प्रेम न खेला ॥ 1 ॥
साँई संग न पावा, सोवत जनम गमावा ॥ 2 ॥
गाफिल नींद न कीजे, आयु घटे तन छीजे ॥ 3 ॥
दादू जीव अयाना, झूठे भरम भुलानां ॥ 4 ॥
अथ राग जंगली गौड़ी
५1. पहरा (पंजाबी भाषा)। कहरवा ताल (बाल्यावस्था)
पहले पहरे रैणि दे, बणिजारिया, तूँ आया इहि संसार वे ।
मायादा रस पीवण लग्गा, बिसाऱ्या सिरजनहार वे ।
सिरजनहार बिसारा किया पसारा, मात पिता कुल नार वे ।
झूठी माया आप बँधाया, चेतै नहीं गँवार वे ।
दादू दास कहै, बणिजारा, तूँ आया इहि संसार वे ॥ 1 ॥
(तरुण अवस्था)
दूजे पहरै रैणि दे, बणिजारिया, तूँ रत्ता तरुणी नाल वे ।
माया मोह फिरै मतवाला, राम न सक्या संभाल वे ।
राम न संभाले, रत्ता नाले, अंध न सूझै काल वे ।
हरि नहीं ध्याया, जन्म गँवाया, दह दिशि फूटा ताल वे ।

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