सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-राग गौड़ी 1
2. अन्य उपदेश । त्रिताल
राम नाम जनि छाड़े कोई, राम कहत जन निर्मल होई ॥ टेक ॥
राम कहत सुख संपति सार, राम नाम तिर लंघे पार ॥ 1 ॥
राम कहत सुधि बुधि मति पाई, राम नाम जनि छाड़हु भाई ॥ 2 ॥
राम कहत जन निर्मल होई, राम नाम कहि कश्मल धोई ॥ 3 ॥
राम कहत को को नहिं तारे, यहु तत दादू प्राण हमारे ॥ 4 ॥
3. स्मरण उपदेश । राज मृगांक ताल
मेरे मन भैया राम कहो रे ।
राम नाम मोहि सहज सुनावै, उनहीं चरण मन कीन रहो रे ॥ टेक ॥
राम नाम ले संत सुहावै, कोई कहै सब शीश सहो रे ।
वाही सौं मन जोरे राखो, नीके राशि लिये निबहो रे ॥ 1 ॥
कहत सुनत तेरो कछू न जावै, पापनि छेदन सोई लहो रे ।
दादू रे जन हरि गुण गावो, कालहि जालहि फेरि दहो रे ॥ 2 ॥
4. विरह । एकताल
कौण विधि पाइये रे, मीत हमारा सोइ ॥ टेक ॥
पास पीव, परदेश है रे, जब लग प्रकटै नांहि।
बिन देखे दुख पाइये, यहु सालै मन मांहि ॥ 1 ॥
जब लग नैन न देखिये, प्रकट मिलै न आइ।
एक सेज संगहि रहै, यहु दुख सह्या न जाइ ॥ 2 ॥
तब लग नेड़ै दूर है रे, जब लग मिले न मोहि।
नैन निकट नहीं देखिये, संग रहे क्या होइ ॥ 3 ॥
कहा करूँ कैसे मिले रे, तलफै मेरा जीव।
दादू आतुर विरहनी, कारण अपने पीव ॥ 4 ॥
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