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सर्वकोश
सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 288, कुल 504 में से

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पृष्ठ 288

विनती का
अंग
अथ विनती का अंग ३४
मंगलाचरण
दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः ।
वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगत: ॥ 1 ॥
करूणा
दादू बहुत बुरा किया, तुम्हें न करना रोष।
साहिब समाई का धनी, बन्दे को सब दोष ॥ 2 ॥
दादू बुरा बुरा सब हम किया, सो मुख कह्या न जाइ ।
निर्मल मेरा सांइयाँ, ताको दोष न लाइ ॥ 3 ॥
साँई सेवा चोर मैं, अपराधी बन्दा ।
दादू दूजा को नहीं, मुझ सरीखा गन्दा ॥ 4 ॥

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