सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-निगुणा का अंग 33
सगुणा निगुणा कृतघ्नी
सुफल वृक्ष परमार्थी, सुख देवै फल फूल।
दादू ऊपर बैस कर, निगुणा काटै मूल ॥ 15 ॥
दादू सगुणा गुण करै, निगुणा मानै नांहि।
निगुणा मर निष्फल गया, सगुणा साहिब मांहि ॥ 16 ॥
निगुणा गुण मानै नहीं, कोटि करै जे कोइ।
दादू सब कुछ सौंपिये, सो फिर बैरी होइ ॥ 17 ॥
दादू सगुणा लीजिये, निगुणा दीजे डार।
सगुणा सन्मुख राखिये, निगुणा नेह निवार ॥ 18 ॥
सगुणा गुण केते करै, निगुणा न मानै एक।
दादू साधू सब कहैं, निगुणा नरक अनेक ॥ 19 ॥
सगुणा गुण केते करै, निगुणा नाखै ढाहि।
दादू साधू सब कहैं, निगुणा निष्फल जाइ ॥ 20 ॥
सगुणा गुण केते करै, निगुणा न मानै कोइ।
दादू साधु सब कहैं, भला कहाँ तैं होइ ॥ 21 ॥
सगुणा गुण केते करै, निगुणा न मानै नीच।
दादू साधू सब कहैं, निगुणा के सिर मीच ॥ 22 ॥
साहिबजी सब गुण करै, सतगुरु के घट होइ।
दादू काढै काल मुख, निगुणा न मानै कोइ ॥ 23 ॥
साहिबजी सब गुण करै, सतगुरु मांही आइ।
दादू राखै जीव दे, निगुणा मेटै जाइ ॥ 24 ॥
साहिबजी सब गुण करै, सतगुरु का दे संग।
दादू परलै राखिले, निगुणा न पलटै अंग ॥ 25 ॥
साहिब जी सब गुण करै, सतगुरु आडा देइ।
दादू तारै देखतां, निगुणा गुण नहिं लेइ ॥ 26 ॥
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