सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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श्री दादूवाणी-निंदा का अंग 32
दादू झूठ दिखावै साच को, भयानक भयभीत ।
साचा राता साच सौं, झूठ न आनै चीत ॥ 15 ॥
साचे को झूठा कहैं, झूठा साच समान ।
दादू अचरज देखिया, यहु लोगों का ज्ञान ॥ 16 ॥
निन्दा
दादू निन्दक बुरा न कहिये, पर उपकारी अस कहाँ लहिये ।
ज्यों ज्यों निन्दैं लोग विचारा, त्यों त्यों छीजै रोग हमारा ॥ 17 ॥
इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्ति योगनाम
तत्वसारमत-सर्वसाधुबुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा
धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं
मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य
बत्तीसवां निन्दा का अंग सम्पूर्ण ॥ अंग 32 ॥ साखी 17 ॥
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