सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1
दया विनती
दादू कहै सतगुरु शब्द सुनाइ करि, भावै जीव जगाइ।
भावै अन्तरि आप कहि, अपने अंग लगाइ ॥ 24 ॥
सतगुरु शब्द बाण
दादू बाहरि सारा देखिये, भीतरि किया चूर।
सतगुरु शब्दों मारिया, जाण न पावै दूर ॥ 25 ॥
दादू सतगुरु मारे शब्द सौं, निरखि निरखि निज ठौर।
राम अकेला रह गया, चित्त न आवै और ॥ 26 ॥
दादू हमको सुख भया, साध शब्द गुरु ज्ञान।
सुधि बुधि सोधी समझकर, पाया पद निर्वाण ॥ 27 ॥
सतगुरु शब्द बाण
दादू शब्द बाण गुरु साध के, दूर दिसन्तरि जाइ।
जिहि लागे सो ऊबरे, सूते लिये जगाइ ॥ 28 ॥
सतगुरु शब्द मुख सौं कह्या, क्या नेड़े क्या दूर।
दादू सिष श्रवणहुँ सुण्या, सुमिरण लागा सूर ॥ 29 ॥
करनी बिना कथनी
शब्द दूध घृत राम रस, मथि करि काढै कोइ।
दादू गुरु गोविन्द बिन, घट घट समझि न होइ ॥ 30 ॥
शब्द दूध घृत राम रस, कोई साध बिलोवणहार।
दादू अमृत काढ़ि ले, गुरुमुखि गहै विचार ॥ 31 ॥
घीव दूध में रमि रह्या, व्यापक सब ही ठौर।
दादू वक्ता बहुत हैं, मथि काढैं ते और ॥ 32 ॥
कामधेनु घट घीव है, दिन दिन दुर्बल होइ।
गौरू ज्ञान न ऊपजै, मथि नहिं खाया सोइ ॥ 33 ॥
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