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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 27, कुल 504 में से

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पृष्ठ 27

श्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1
दादू काढै काल मुखि, अंधे लोचन देइ।
दादू ऐसा गुरु मिल्या, जीव ब्रह्म कर लेइ ॥ 13 ॥
दादू काढै काल मुखि, श्रवणहुँ सबद सुनाइ।
दादू ऐसा गुरु मिल्या, मृतक लिये जिलाइ ॥ 14 ॥
दादू काढै काल मुखि, गूंगे लिये बुलाइ।
दादू ऐसा गुरु मिल्या, सुख में रहे समाइ ॥ 15 ॥
दादू काढै काल मुख, मिहर दया करि आइ।
दादू ऐसा गुरु मिल्या, महिमा कही न जाइ ॥ 16 ॥
सतगुरु काढै केस गहि, डूबत इहि संसार।
दादू नाव चढ़ाइ करि, कीये पैली पार ॥ 17 ॥
भौ सागर में डूबतां, सतगुरु काढै आय।
दादू खेवट गुरु मिल्या, लीये नाव चढ़ाइ ॥ 18 ॥
दादू उस गुरुदेव की, मैं बलिहारी जाऊँ।
जहाँ आसण अमर अलेख था, ले राखे उस ठाऊँ ॥ 19 ॥
ज्ञानोत्पत्ति
आत्म मांहै ऊपजै, दादू पंगुल ज्ञान।
कृतम् जाइ उलंधि करि, जहां निरंजन थान ॥ 20 ॥
आत्म बोध बँझ का बेटा, गुरु मुखि उपजै आइ।
दादू पंगुल पंच बिन, जहाँ राम तहँ जाइ ॥ 21 ॥
गुरु शब्द
साचा सहजैं ले मिलै, शब्द गुरु का ज्ञान।
दादू हमको ले चल्या, जहाँ प्रीतम का स्थान ॥ 22 ॥
दादू शब्द विचार करि, लागि रहे मन लाइ।
ज्ञान गहै गुरुदेव का, दादू सहज समाइ ॥ 23 ॥

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