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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 29, कुल 504 में से

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पृष्ठ 29

श्री दादूवाणी-गुरुदेव का अंग 1
साचा समर्थ गुरु मिल्या, तिन तत्त दिया बताइ ।
दादू मोटा महाबली, घट घृत मथि कर खाइ ॥ 34 ॥
मथि करि दीपक कीजिये, सब घट भया प्रकाश ।
दादू दीवा हाथि करि, गया निरंजन पास ॥ 35 ॥
परमार्था
दीवै दीवा कीजिये, गुरुमुख मार्ग जाइ ।
दादू अपने पीव का, दर्शन देखै आइ ॥ 36 ॥
दादू दीया है भला, दीया करौ सब कोइ ।
घर में धन्धा न पाइये, जे कर दीया न होइ ॥ 37 ॥
दादू दीये का गुण तेल है, दीया मोटी बात ।
दीया जग में चाँदणां, दीया चालै साथ ॥ 38 ॥
सत्य गुरु
निर्मल गुरु का ज्ञान गहि, निर्मल भक्ति विचार ।
निर्मल पाया प्रेम रस, छूटे सकल विकार ॥ 39 ॥
निर्मल तन मन आत्मा, निर्मल मनसा सार ।
निर्मल प्राणी पंच कर, दादू लंघे पार ॥ 40 ॥
परापरी पासै रहै, कोइ न जाणै ताहि ।
सतगुरु दिया दिखाइ करि, दादू रह्या ल्यौ लाइ ॥ 41 ॥
शिष्य जिज्ञासा
जिन हम सिरजे सो कहाँ, सतगुरु देहु दिखाइ ।
दादू दिल अरवाह का, तहँ मालिक ल्यौ लाइ ॥ 42 ॥
मुझ ही मैं मेरा धणी, पड़दा खोलि दिखाइ ।
आत्म सौं परमात्मा, प्रकट आण मिलाइ ॥ 43 ॥
भरि भरि प्याला, प्रेम रस, अपणे हाथ पिलाइ ।
सतगुरु के सदिकै किया, दादू बलिबलि जाइ ॥ 44 ॥

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