सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-काल का अंग 25
दादू काया कारवीं, मोहि भरोसा नांहि।
आसन कुंजर शिर छत्र, विनश जाहिं क्षण मांहि ॥ 17 ॥
दादू काया कारवीं, पड़त न लागै बार।
बोलणहारा महल में, सो भी चालणहार ॥ 18 ॥
दादू काया कारवीं, कदे न चालै संग।
कोटि वर्ष जे जीवना, तऊ होइला भंग ॥ 19 ॥
कहतां, सुनतां, देखतां, लेतां, देतां प्राण।
दादू सो कतहूँ गया, माटी धरी मसाण ॥ 20 ॥
सींगी नाद न बाजहि, कत गये सो जोगी।
दादू रहते मढी में, करते रस भोगी ॥ 21 ॥
दादू जियरा जायगा, यहु तन माटी होइ।
जे उपज्या सो विनश है, अमर नहीं कलि कोइ ॥ 22 ॥
दादू देही देखतां, सब किसही की जाइ।
जब लग श्वास शरीर में, गोविन्द के गुण गाइ ॥ 23 ॥
दादू देही पाहुणी, हंस बटाऊ मांहि।
का जाणूं कब चालसी, मोहि भरोसा नांहि ॥ 24 ॥
दादू सबको पाहुणा, दिवस चार संसार।
औसर औसर सब चले, हम भी इहै विचार ॥ 25 ॥
भयमय पंथ बिख्रमता
सबको बैठे पंथ सिर, रहे बटाऊ होइ।
जे आये ते जाहिंगे, इस मारग सब कोइ ॥ 26 ॥
बेग बटाऊ पंथ सिर, अब विलम्ब न कीजे।
दादू बैठा क्या करे, राम जप लीजे ॥ 27 ॥
संझ्या चलै उतावला, बटाऊ वन-खंड मांहि।
बरियाँ नांहीं ढील की, दादू बेगि घर जांहि ॥ 28 ॥
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