सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-जीवित मृतकका अंग 23
मेरे आगे मैं खड़ा, ता तैं रह्या लुकाइ ।
दादू प्रकट पीव है, जे यहु आपा जाइ ॥ 17 ॥
सूक्ष्म-मार्ग
दादू जीवित मृतक होइ कर, मारग मांही आव ।
पहली शीश उतार कर, पीछे धरिये पांव ॥ 18 ॥
दादू मारग साधु का, खरा दुहेला जान ।
जीवित मृतक ह्वै चलै, राम नाम नीशान ॥ 19 ॥
दादू मारग कठिन है, जीवित चलै न कोइ ।
सोई चलि है बापुरा, जो जीवित मृतक होइ ॥ 20 ॥
मृतक होवै सो चलै, निरंजन की बाट।
दादू पावै पीव को, लंघै औघट घाट ॥ 21 ॥
जीवित मृतक
दादू मृतक तब ही जानिये, जब गुण इंद्रिय नांहि ।
जब मन आपा मिट गया, तब ब्रह्म समाना मांहि ॥ 22 ॥
दादू जीवित ही मर जाइये, मर माँही मिल जाइ ।
सांई का संग छाड़ कर, कौन सहै दुख आइ ॥ 23 ॥
उभय निर्दोष
दादू आपा कहा दिखाइये, जे कुछ आपा होइ ।
यहु तो जाता देखिये, रहता चीन्हों सोइ ॥ 24 ॥
दादू आप छिपाइये, जहाँ न देखै कोइ ।
पीव को देख दिखाइये, त्यों त्यों आनन्द होइ ॥ 25 ॥
आपा निर्दोष
दादू अंतरगति आपा नहीं, मुख सौं मैं तैं होइ ।
दादू दोष न दीजिये, यों मिल खेलैं दोइ ॥ 26 ॥
जे जन आपा मेट कर, रहें राम ल्यौ लाइ ।
दादू सब ही देखतां, साहिब सौं मिल जाइ ॥ 27 ॥
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