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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 23, कुल 504 में से

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पृष्ठ 23

श्री दादूवाणी-मंगलाचरण
आदि अंत हरि सेवही, मिल सबही साधू ।
इन रागन में पद किये, श्री सतगुरु-दादू ॥ 7 ॥
अंग-रागन का जोड़ यह, महानन्द गाया ।
गुरु-दादू परसाद तैं, हरि हिरदै पाया ॥ 8 ॥
मंगलाचरण
दादू नमो नमो निरञ्जनं, नमस्कार गुरु देवतः ।
वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगतः ॥ 1 ॥
परब्रह्म परापरं, सो मम् देव निरंजनम् ।
निराकारं निर्मलं, तस्य दादू वन्दनम् ॥ 2 ॥
गुरुब्रह्मा गुरुर्विष्णु, गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परंब्रह्म, तस्मै श्री गुरवे नमः॥ 3 ॥
अखण्डमण्डलाकारं, व्याप्तं येन चराचरं ।
तत्पदं दर्शितं येन, तस्मै श्री गुरवे नमः॥ 4 ॥
केशराम्बरधरं स्वामी, नूर तेज सुधामयम् ।
दादू दयालु दया कृत्यं, सर्व विघ्न विनाशन् ॥ 5 ॥
काश्मीर रंजितं वस्त्रं, गौरवर्णं शशीप्रभम् ।
दधानं श्रीगुरुंदादूं, वंदे कारण विग्रहम् ॥ 6 ॥
जो प्रभु जग में ज्योतिर्मय, कारण करण अभेव ।
विघ्न हरण मंगलकरण, श्री नमो निरंजन देव ॥ 7 ॥
स्वामी दादू सुमिरिये, गहिये निर्मल ज्ञान ।
मनसा वाचा कर्मणा, सुन्दर धरिये ध्यान ॥ 8 ॥
स्वामी दादू ब्रह्म है, फेर सार नहिं कोय ।
सुन्दर ताकों सुमिरतां, सब सिध कारज होय ॥ 9 ॥

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