सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
पृष्ठ 22, कुल 504 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-दादूवाणी के राग नाम
कालहि मेट सजीवनी, पारस घर आया ।
उपजन, दया, निर्वैरता, सुंदरि पिव पाया ॥ 6 ॥
कस्तूरी की बॉंस ले, निन्दा परिहरिये ।
निगुणा नेह निवार कर, हरी बिनती करिये ॥ 7 ॥
साखीभूत बेली बधी, अबिहड़ अंग लागा ।
अमर भये अरु थिर हुवै, हरि-संगति पागा ॥ 8 ॥
दादू दीनदयाल की, बानी बिस्वाबीस ।
सकल अंक सो सोध कर, अंग धरे सैंतीस ॥ 9 ॥
इन सैंतीसों अंग में, परमारथ गाया ।
'महानन्द' मुक्ता भया, गुरु दादू पाया ॥ 10 ॥
दादूवाणी के राग नाम
राग विविध बहु शोध कर, हरि का गुण गाया ।
साध महामुनि जे भये, परमेश्वर पाया ॥ 1 ॥
प्रथम गौड़ी मालवा, कीया कल्याना ।
कनड़ा अड़ाणा आण कर, केदार ठाना ॥ 2 ॥
मारू रामकली भली, आशावरि सिन्धूड़ा ।
देवगन्धार कलिंगडा, परजिया पाया ॥ 3 ॥
भाणमली गायन रली, सारँग सार तोडी ।
हुसैनी बंगाली गावताँ, ऐसे मन होडी ॥ 4 ॥
नटनारायण सोरठी, गुंड प्रेम अपारा ।
बिलावल सोहे सदा, सोहे रस सारा ॥ 5 ॥
बसंत भैरूं ललिता भनी, जैतश्री सवाई ।
धनाश्री और अनन्त की, मिल आरति गाई ॥ 6 ॥
- 22 -