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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 20, कुल 504 में से

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पृष्ठ 20

श्री दादूवाणी-महिमा महात्म्य
भये सम्पूर्ण पद अरु साखी, भक्ति मुक्ति तिनमें सो भाखी ।
मनसा वाचा बाचै कोई, ताकूँ आवागमन न होई ॥5॥
वाणी दादू दयालु की, सब शास्त्रन को सार ।
पढे विचारे प्रीती सूं, जे जन उतरे पार ॥ 6 ॥
दादू दीन दयालु की, वाणी विस्वावीस ।
तिनकूं खोजि विचार करि, अंग धरे सैंतीस ॥ 7 ॥
तिन माहीं जो हारडे, तिनके तिते स्वरुप ।
कोई विवेकी केलवे, काढै अर्थ अनूप ॥ 8 ॥
वाणी दादू दयालु की, वाणी कंचन रूप ।
कोई इक सोनी संत जन, घड़ि हैं घाट अनूप ॥ 9 ॥
वाणी दादू दयालु की, वाणी अनुभव सार ।
जो जन या हृदय धरै, सो जन उतरे पार ॥ 10 ॥
जे जन पढ़े जु प्रीति सूं, उपजे आत्मज्ञान ।
तिनकूं आनन भास ही, एक निरंजन ध्यान ॥ 11 ॥
जिनके या हृदय बसी, याही में मन दीं ।
तिनकूं अति मीठी लगी, आठ पहर लैलीन ॥ 12 ॥
वेद पुराण सब शास्त्र, और जीते जो ग्रन्थ ।
तिनको बोध बिलोइकै, यह काढ्या निज मंथ ॥ 13 ॥
बोले दादू दासजी, साचै शब्द रसाल ।
तिनकी उपमा को कहै, मानो उगले लाल ॥ 14 ॥
या वाणी सुनि ज्ञान ह्वे, याही तै वैराग्य ।
या सुन भजन भक्ति बढ़े, या सुन माया त्याग ॥ 15 ॥
या वाणी पढ़ि प्रेम ह्वे, या पढ़ि प्रीति अपार ।
या पढ़ि निश्चय नाम की, या पढ़ि प्राण अधार ॥ 16 ॥

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