सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
DevanagariHindipublished504 पृष्ठ
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मध्य
का
अंग
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अथ मध्य का अंग १६
मंगलाचरण
दादू नमो नमो निरंजनं, नमस्कार गुरुदेवतः ।
वन्दनं सर्व साधवा, प्रणामं पारंगत: ॥ 1 ॥
मध्य निष्पक्ष
दादू द्वै पख रहिता सहज सो, सुख दुख एक समान।
मरै न जीवै सहज सो, पूरा पद निर्वाण ॥ 2 ॥
सहज रूप मन का भया, जब द्वै द्वै मिटी तरंग।
ताता शीला सम भया, तब दादू एकै अंग ॥ 3 ॥
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