सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-साधु का अंग 15
अज्ञान मूर्खः हितकारी, सज्जनो हि समो रिपुः ।
ज्ञात्वा(परि)त्यजंति ते, निरामयी मनोजितः ।। 111 ।।
कुसंगति केते गये, तिनका नांव न ठांव ।
दादू ते क्यों उब्बरैं, साधु नहीं जिस गाँव ।। 112 ।।
भाव भक्ति का भंग कर, बटपारे मारहिं बाट।
दादू द्वारा मुक्ति का, खोले जड़े कपाट ।। 113 ।।
सत्संग महिमा महात्म
साधु संगति अंतर पड़े, तो भागेगा किस ठौर ।
प्रेम भक्ति भावै नहीं, यहु मन का मत और ।। 114 ।।
दादू राम मिलन के कारणे, जे तूँ खरा उदास ।
साधु संगति शोध ले, राम उन्हीं के पास ।। 115 ।।
पुरुष प्रकाशिक संत महिमा
ब्रह्मा शंकर सेष मुनि, नारद ध्रुव शुकदेव ।
सकल साधु दादू सही, जे लागे हरि सेव ।। 116 ।।
साधु कंवल हरि वासना, संत भ्रमर संग आइ ।
दादू परिमल ले चले, मिले राम को जाइ ।। 117 ।।
साधु सज्जन
दादू सहजैं मेला होइगा, हम तुम हरि के दास ।
अंतरगति तो मिलि रहे, पुनि प्रकट प्रकाश ।। 118 ।।
दादू मम सिर मोटे भाग, साधों का दर्शन किया ।
कहा करै जम काल, राम रसायन भर पिया ।। 119 ।।
साधु समर्थता
दादू एता अविगत आप थैं, साधों का अधिकार ।
चौरासी लख जीव का, तन मन फेरि सँवार ।। 120 ।।
विष का अमृत कर लिया, पावक का पाणी ।
बाँका सूधा करि लिया, सो साध बिनाणी ।। 121 ।।
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