सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-साधु का अंग 15
आन कथा संसार की, हमहिं सुणावै आइ।
तिसका मुख दादू कहै, दई न दिखाइ ताहि ॥ 26 ॥
दादू मुख दिखलाइ साधु का, जे तुमहिं मिलावै आइ।
तुम मांही अन्तर करै, दई न दिखाइ ताहि ॥ 27 ॥
जब द्रवो तब दीजिये, तुम पै मांगूं येहु।
दिन प्रति दर्शन साधु का, प्रेम भक्ति दृढ़ देहु ॥ 28 ॥
साधु सपीड़ा मन करै, सतगुरु शब्द सुनाइ।
मीरां मेरा मिहर कर, अन्तर विरह उपाइ ॥ 29 ॥
जिज्ञासु कसौटी
ज्यों ज्यों होवै त्यों कहै, घट बध कहै न जाइ।
दादू सो सुध आत्मा, साधू परसै आइ ॥ 30 ॥
सत्संग महिमा
साहिब सौं सन्मुख रहै, सत संगति में आइ।
दादू साधू सब कहैं, सो निष्फल क्यों जाइ ॥ 31 ॥
ब्रह्म गाय त्रि लोक में, साधु अस्तन पान।
मुख मारग अमृत झरै, कत ढूँढै दादू आन ॥ 32 ॥
दादू पाया प्रेम रस, साधु संगति मांहि।
फिरि फिरि देखे लोक सब, यहु रस कतहूँ नांहि ॥ 33 ॥
दादू जिस रस को मुनिवर मरैं, सुर नर करैं कलाप।
सो रस सहजैं पाइये, साधु संगति आप ॥ 34 ॥
संगति बिन सीझे नहीं, कोटि करे जे कोइ।
दादू सतगुरु साधु बिन, कबहुँ शुद्ध न होइ ॥ 35 ॥
दादू नेड़ा दूर तैं, अविगत का आराध।
मनसा वाचा कर्मणा, दादू (साधु) संगति साध ॥ 36 ॥
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