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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 178, कुल 504 में से

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पृष्ठ 178

श्री दादूवाणी-सांच का अंग 13
सूक्ष्म मार्ग
पावैंगे उस ठौर को, लंघेंगे यहु घाट।
दादू क्या कह बोलिये, अजहुं बिच ही बाट॥ 173 ॥
सांच
साचा राता सांच सौं, झूठा राता झूठ।
दादू न्याय निबेरिये, सब साधों को पूछ॥ 174 ॥
अद्वैत निरुपण
जे पहुँचे ते कह गए, तिनकी एकै बात।
सबै सयाने एक मत, उनकी एकै जात॥ 175 ॥
जे पहुँचे तेहि पूछिये, तिनकी एकै बात।
सब साधों का एक मत, ये बिच के बारह बाट॥ 176 ॥
सबै सयाने कह गये, पहुँचे का घर एक।
दादू मार्ग माहिं ले, तिन की बात अनेक॥ 177 ॥
सूरज साखी भूत है, साच करै परकास।
चोर डरै चोरी करै, रैन तिमिर का नाश॥ 178 ॥
चोर न भावै चांदणां, जनि उजियारा होइ।
सूते का सब धन हरूँ, मुझे न देखै कोइ॥ 179 ॥
संस्कार आगम
घट घट दादू कह समझावै, जैसा करै सो तैसा पावै।
को घट पापी को घट पुण्य। को घट चेतन को घट शून्य?
को काहू का सीरी नांहीं, साहिब देखे सब घट माँहीं॥ 180 ॥
इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम
तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्नान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा
धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं
मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य
तेरहवां साँच कअंग सम्पूर्ण ॥ अंग 13 ॥ साखी 180 ॥

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