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सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)

Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary

सन्त दादू दयाल जी द्वारा

DevanagariHindipublished504 पृष्ठ

पृष्ठ 163, कुल 504 में से

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पृष्ठ 163

श्री दादूवाणी-सांच का अंग 13
दादू कोई काहू जीव की, करै आत्माघात ।
साच कहूँ संशय नहीं, सो प्राणी दोज़ख जात ॥ 4 ॥
दादू नाहर सिंह सियाल सब, केते मुसलमान ।
माँस खाइ मोमिन भये, बड़े मियां का ज्ञान ॥ 5 ॥
दादू माँस अहारी जे नरा, ते नर सिंह सियाल ।
बक1 मंजार2 सुनहाँ3 सही, एता प्रत्यक्ष काल ॥ 6 ॥
दादू मुई मार मानुष घणे, ते प्रत्यक्ष जम काल ।
महर दया नहीं सिंह दिल, कूकर काग सियाल ॥ 7 ॥
माँस अहारी मद पीवै, विषय विकारी सोइ ।
दादू आत्मराम बिन, दया कहाँ थी होइ ॥ 8 ॥
लंगर लोग लोभ सौं लागैं, बोलैं सदा उन्हों की भीर ।
जोर जुल्म बीच बटपारे, आदि अंत उन्हीं सौं सीर ॥ 9 ॥
तन मन मार रहे सांई सौं, तिनकौं देख करैं ताजीर ।
ये बड़ि-बूझ कहाँ थैं पाई, ऐसी कजा अवलिया पीर ॥ 10 ॥
बे महर गुमराह गाफिल, गोश्त खुरदनी ।
बेदिल बदकार आलम, हयात मुरदनी ॥ 11 ॥
छल कर बल कर घाइ कर, मारै जिंहि तिंहि फेरि ।
दादू ताहि न धीजिये, परणै सगी पतेरि ॥ 12 ॥
दादू दुनियां सौं दिल बांध करि, बैठे दीन गँवाइ ।
नेकी नाम बिसार करि, करद कमाया खाइ ॥ 13 ॥
दादू गल काटैं कलमा भरैं, अया विचारा दीन ।
पंचों वक्त नमाज गुजारैं, साबित नहीं यकीन ॥ 14 ॥
दुनियां के पीछे पड़ा, दौड़ा दौड़ा जाइ ।
दादू जिन पैदा किया, ता साहिब को छिटकाइ ॥ 15 ॥

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