सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-माया का अंग 12
विषया का रस मद भया, नर नारी का माँस ।
माया माते मद पिया, किया जन्म का नाश ॥ 67 ॥
दादू भावै शाक्त भक्त हो, विषय हलाहल खाइ ।
तहँ जन तेरा राम जी, सपने कदे न जाइ ॥ 68 ॥
दादू खाडा बूजी भगत है, लोहरवाडा माँहि ।
परगट पैंडाइत बसैं, तहँ संत काहे को जांहि ॥ 69 ॥
साँपणि एक सब जीव को, आगे पीछे खाइ ।
दादू कहि उपकार कर, कोइ जन ऊबर जाइ ॥ 70 ॥
दादू खाये साँपणी, क्यों कर जीवैं लोग ।
राम मंत्र जन गारुड़ी, जीवैं इहि संजोग ॥ 71 ॥
दादू माया कारण जग मरै, पीव के कारण कोइ ।
देखो ज्यों जग परजलै, निमष न न्यारा होइ ॥ 72 ॥
काल कनक अरु कामिनी, परिहर इन का संग ।
दादू सब जग जल मुवा,ज्यों दीपक ज्योति पतंग ॥ 73 ॥
दादू जहाँ कनक अरु कामनी, तहँ जीव पतंगे जांहि ।
आग अनंत सूझै नहीं, जल-जल मूये माँहि ॥ 74 ॥
घट माँही माया घणी, बाहर त्यागी होइ ।
फाटी कंथा पहर कर, चिन्ह करै सब कोइ ॥ 75 ॥
काया राखे बन्ध दे, मन दह दिशि खेले ।
दादू कनक अरु कामिनी, माया नहीं मेले ॥ 76 ॥
दरसन पहरै मूंड मुंडावै, दुनियां देख त्याग दिखलावै ।
मन सौं मीठी मुख सौं खारी, माया त्यागी कहैं बजारी ॥ 77 ॥
माया मंदिर मीच का, तामैं पैठा धाइ ।
अंध भया सूझै नहीं, साध कहैं समझाइ ॥ 78 ॥
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