सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-माया का अंग 12
ता कारण हत आतमा, झूठ कपट अहंकार।
सो माटी मिल जायगा, बिसऱ्या सिरजनहार ॥ 45 ॥
दादू जन्म गया सब देखतां, झूठी के संग लाग।
साचे प्रीतम को मिले, भाग सके तो भाग ॥ 46 ॥
दादू गतं गृहं, गतं धनं, गतं दारा सुत यौवनं।
गतं माता, गतं पिता, गतं बंधु सज्जनं।
गतं आपा, गतं परा, गतं संसार कत रंजनं।
भजसि भजसि रे मन, परब्रह्म निरंजनं ॥ 47 ॥
आसक्ति मोह
जीवों माँही जीव रहै, ऐसा माया मोह।
सांई सूधा सब गया, दादू नहीं अंदोह ॥ 48 ॥
विरक्तता
माया मगहर खेत खर, सद्गति कदे न होइ।
जे बंचे ते देवता, राम सरीखे सोइ ॥ 49 ॥
कालर खेत न नीपजै, जो बाहे सौ बार।
दादू हाना बीज का, क्या पचि मरै गँवार ॥ 50 ॥
दादू इस संसार सौं, निमष न कीजे नेह।
जामण मरण आवटणा, छिन छिन दाझै देह ॥ 51 ॥
दादू मोह संसार को, विहरै तन मन प्राण।
दादू छूटै ज्ञान कर, को साधु संत सुजाण ॥ 52 ॥
मन हस्ती माया हस्तिनी, सघन वन संसार।
तामैं निर्भय हो रह्या, दादू मुग्ध गँवार ॥ 53 ॥
दादू काम कठिन घट चोर है, घर फोड़ै दिन रात।
सोवत साह न जागई, तत्त्व वस्तु ले जात ॥ 54 ॥
काम कठिन घट चोर है, मूसे भरे भंडार।
सोवत ही ले जायगा, चेतन पहरे चार ॥ 55 ॥
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