सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-जरणा का अंग 5
अजर जरै रस ना झरै, पीवत थाकै नांहि।
दादू सेवक सो भला, भर राखै घट मांहि ॥ 17 ॥
साधु महिमा
जरणा जोगी जुग जुग जीवै, झरणा मर मर जाइ।
दादू जोगी गुरुमुखी, सहजैं रहै समाइ ॥ 18 ॥
जरणा जोगी जग रहै, झरणा परलै होइ।
दादू जोगी गुरुमुखी, सहज समाना सोइ ॥ 19 ॥
जरणा जोगी थिर रहै, झरणा घट फूटै।
दादू जोगी गुरुमुखी, काल थैं छूटै ॥ 20 ॥
जरणा जोगी जगपती, अविनाशी अवधूत।
दादू जोगी गुरुमुखी, निरंजन का पूत ॥ 21 ॥
जरै सु नाथ निरंजन बाबा, जरै सु अलख अभेव।
जरै सु जोगी सब की जीवन, जरै सु जग में देव ॥ 22 ॥
जरै सु आप उपावनहारा, जरै सु जगपति सांईं।
जरै सु अलख अनूप है, जरै सु मरणा नांहीं ॥ 23 ॥
जरै सु अविचल राम है, जरै सु अमर अलेख।
जरै सु अविगत आप है, जरै सु जग में एक ॥ 24 ॥
जरै सु अविगत आप है, जरै सु अपरम्पार।
जरै सु अगम अगाध है, जरै सु सिरजनहार ॥ 25 ॥
जरै सु निज निराकार है, जरै सु निज निरधार।
जरै सु निज निर्गुणमयी, जरै सु निज तत सार ॥ 26 ॥
जरै सु पूरण ब्रह्म है, जरै सु पूरणहार।
जरै सु पूरण परमगुरु, जरै सु प्राण हमार ॥ 27 ॥
दादू जरै सु ज्योति स्वरूप है, जरै सु तेज अनन्त।
जरै सु झिलमिल नूर है, जरै सु पुंज रहंत ॥ 28 ॥
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