सन्त दादू दयाल वाणी (सन्त दादू दयाल जी - सम्पूर्ण साखी एवं पद सटीक)
Sant Dadu Dayal Vani with Hindi Commentary
सन्त दादू दयाल जी द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंश्री दादूवाणी-जरणा का अंग 5
दादू जरै सु परम प्रकाश है, जरै सु परम उजास ।
जरै सु परम उदीत है, जरै सु परम विलास ॥ 29 ॥
दादू जरै सु परम पगार है, जरै सु परम विगास ।
जरै सु परम प्रभास है, जरै सु परम निवास ॥ 30 ॥
परमेश्वर की दयालुता
दादू एक बोल भूले हरि, सो कोई न जाणै प्राण ।
औगुण मन आणै नहिं, और सब जाणै हरि जाण ॥ 31 ॥
सतगुरु अगम बात जानने के लिए विनय करते हैं
दादू तुम जीवों के औगुण तजे, सु कारण कौन अगाध ?
मेरी जरणा देख कर, मति को सीखें साध ॥ 32 ॥
धारणा
पवना पानी सब पिया, धरती अरु आकास ।
चन्द सूर पावक मिले, पंचों एक ग्रास ॥ 33 ॥
चौदह तीनों लोक सब, ढूंगे श्वासै श्वास ।
दादू साधू सब जरैं, सतगुरु के विश्वास ॥ 34 ॥
इति श्री दादूदास-विरचिते सतगुरु-प्रसादेन प्रोक्तं भक्तियोगनाम
तत्वसारमत-सर्वसाधुर्बुद्धिज्ञान-सर्वशास्त्र-शोधितं रामनाम सतगुरुशिक्षा
धर्मशास्त्र-सत्योपदेश-ब्रह्मविद्यायां मनुष्य जीवनाम् नित्य-श्रवणं पठनं
मोक्षदायकम् श्री दादूवाणीनाम् माहात्म्य
पांचवां जरणा का अंग सम्पूर्ण ॥ अंग 5 ॥ साखी 34 ॥
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