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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 6

दो शब्द
भारत की स्वतन्त्रता-प्राप्ति तथा इस राष्ट्र के निर्माण में क्रांतिकारियों
का अवदान अन्य आंदोलनों की तुलना में किसी भी प्रकार कम नहीं रहा
है। वास्तविकता तो यह है कि भारतीय स्वतन्त्रता आंदोलन का इतिहास
1857 की क्रांति से ही प्रारम्भ होता है, किंतु खेद का विषय है कि हमारे
इतिहास-लेखकों ने क्रांतिकारियों के इस अवदान का उचित मूल्यांकन नहीं
किया है।
चन्द्रशेखर आजाद भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन की एक निरुपम
विभूति हैं। भारत की स्वतन्त्रता के लिए उनका अनन्य देशप्रेम, अदम्य
साहस, प्रशंसनीय चरित्रबल आदि इस राष्ट्र के स्वतंत्रता-प्रहरियों को सदा-
सर्वदा एक आदर्श प्रेरणा देते रहेंगे। एक अति निर्धन परिवार में जन्म
लेकर भी उन्होंने राष्ट्र-प्रेम का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, वह प्रशंसनीय ही
नहीं, स्पृहणीय भी है। आजाद वस्तुतः देश प्रेम, त्याग, आत्मबलिदान आदि
सद्गुणों के प्रतीक हैं।
भारत के महापुरुषों में आत्मप्रशंसा से दूर रहने की परम्परा रही है।
इसलिए आजाद भी अपने विषय में अपने साथियों तक को कभी कुछ नहीं
बताते थे। एक बार भगतसिंह द्वारा उनके घर-परिवार आदि के विषय में
पूछे जाने पर उन्होंने कहा था—"दल का सम्बन्ध मुझसे है; मेरे घरवालों
से नहीं। मैं नहीं चाहता कि मेरी जीवनी लिखी जाए।" इसके साथ ही
क्रांतिकारियों के आंदोलन गुप्त आंदोलन थे। अतः अन्य आंदोलनों के
समान इनका निर्विवाद इतिहास मिलना असम्भव-सा लगता है। यही
[का]रण है कि आजाद के जीवन की घटनाओं का विभिन्न पुस्तकों में भिन्न-
......... होता है।