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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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चन्द्रशेखर आजाद

ने समझाया तथा उन पर जोर डाला कि वह घर लौट चलें, किन्तु आजाद
भी बचपन से ही अपने हठ के धनी थे। वह देश-सेवा का व्रत ले चुके थे।
किसी भी श्रेष्ठ व्यक्ति के लिए अपना लक्ष्य ही सबसे महान होता है।
महापुरुष जिस कार्य को करने की ठान लेते हैं, दुनिया भर की विपत्तियां
आ जाने पर भी, वह अपने मार्ग से नहीं हटते, अतः उन्होंने अपने पिताजी
का यह प्रस्ताव नहीं माना। पिताजी निराश होकर वापस घर लौट गये।
यह उनका अपने घर के प्रति एक प्रकार का विद्रोह ही था। वस्तुतः
आजाद की दृष्टि में सारा देश ही अपना घर था। आचार्य चाणक्य ने
कुल के लिए एक व्यक्ति का, ग्राम के लिए कुल का तथा राज्य अथवा देश
के लिए ग्राम का भी परित्याग करने की शिक्षा दी है। चन्द्रशेखर आजाद
ने भी ऐसा ही किया, उन्होंने भारत भूमि के हित में संकीर्ण पारिवारिक
मोह तथा उसके सम्बन्धों को तिलांजलि दे दी।