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अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

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पृष्ठ 28

चन्द्रशेखर आजाद २५
विद्यार्थी निर्भीक खड़े थे। आजाद से पहलेवाले लड़के से मजिस्ट्रेट ने पूछा,
"तुम्हारा नाम?"
"नवम्बर।" लड़के ने उत्तर दिया।
"तुम्हारे बाप का नाम?"
"दिसम्बर।"
इन उत्तरों को खरेघाट ने अपने लिए अपमानजनक समझा। इसके
बाद उसने चन्द्रशेखर आजाद से पूछा, "तुम्हारा नाम"
"आजाद।" चन्द्रशेखर बोले।
"पिता का नाम?"
"स्वाधीन।"
"तुम्हारा घर कहाँ है?"
"जेल में।"
इस प्रकार के उत्तरों से मजिस्ट्रेट तिलमिलाकर रह गया। बड़े-बड़े
अपराधी उसके सामने उत्तर देने का साहस भी नहीं कर पाते थे। अतः
उसने क्रोध में आकर आजाद को पन्द्रह बेतों की कठोर सजा दी। बेतों की
सजा वास्तव में कठोर समझी जाती थी। इसे सुनकर ही अभियुक्त काँप
उठते थे, बेतों की मार से चमड़ी उधड़ जाती थी, परन्तु चन्द्रशेखर ने इस
दण्ड की कोई परवाह नहीं की।