सामग्री पर जाएँ
सर्वकोश
अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)

Amar Shaheed Chandrashekhar Azad

सूचना एवं प्रसारण मन्त्रालय, भारत सरकार द्वारा

DevanagariHindipublished148 पृष्ठ

पृष्ठ 22, कुल 148 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 22

न्द्रशेखर आजाद 19
पूर्व घटना है; एक उज्ज्वलतम ऐतिहासिक पहलू है ।
दिल्ली के साथ ही सारे देश में इस बिल का विरोध हुआ। सन् 1919
में अमृतसर में कांग्रेस का अधिवेशन होने वाला था। इसकी तैयारियाँ
डॉक्टर किचलू तथा सत्यपाल कर रहे थे। सरकार ने इन दोनों को
गिरफ्तार करके किसी अज्ञात स्थान पर भेज दिया। जनता इसका कारण
जानने के लिए मजिस्ट्रेट से मिलने के लिए चल पड़ी, किन्तु पुलिस ने उसे
रास्ते में ही रोक दिया। इसी बीच हिंसक उपद्रव हो गया, जिसमें पाँच
गोरे मारे गये। कई मकानों में आग लगा दी गई। जनता में आक्रोश की
कोई सीमा नहीं थी। गुजरांवाला तथा कसूर में भी हिंसक घटनाएँ हुईं।
डॉ० सत्यपाल ने गांधीजी को अमृतसर आने के लिए पत्र लिखा था। वह
8 अप्रैल को पंजाब के लिए प्रस्थान कर चुके थे। रास्ते में ही पलवल
नामक स्टेशन पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और बम्बई भेज दिया
गया।
रौलेट बिल के विरोध में पूरे पंजाब में जुलूस निकाले गये। सड़कों
पर तीन-तीन मील लम्बे जुलूस देखे गये। सड़कें प्रदर्शन करने वालों से
ठसाठस भरी हुई थीं। काले झण्डों का प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनों के
साथ ही हड़ताल भी की गई। यह हड़ताल सात दिनों तक चली। पुलिस
बलात् दूकान खुलवा देती, किन्तु पुलिस के हटते ही दुकानें फिर बन्द हो
जातीं। लाहौर में हड़ताल के दौरान बाजार की गलियों में खाना बनता
था। महिलाएँ अपनी इच्छा से इसमें काम करती थीं, ताकि काम करने
वाले तथा मजदूरी पर निर्भर रहनेवाली जनता को खाना मिल सके।
लोगों ने अपने संकीर्ण स्वार्थों से ऊपर उठकर देश के हित में आन्दोलन में
भाग लिया। जगह-जगह रौलेट बिल हाय-हाय के नारे लग रहे थे, सम्राट्
पञ्चम जार्ज के पुतले जलाये जा रहे थे। पुलिस जब चाहती जगह-जगह
लाठीचार्ज करती रहती थी। कई जगहों पर पुलिस ने गोलियां भी चलाईं।
धड़ाधड़ गिरफ्तारियाँ तथा बाजारों में खुलेआम प्रदर्शनकारियों को बेंत
लगाना साधारण बात हो गई थी। सरकार हड़ताल समाप्त करने तथा
प्रदर्शन रोकने के लिए पोस्टर चिपकाती, किन्तु जनता उन्हें फाड़
डालती।