अमर शहीद चन्द्रशेखर आज़ाद (हिन्दुस्तान समाजवादी प्रजातन्त्र सेना के प्रधान सेनापति का शौर्य इतिहास)
Amar Shaheed Chandrashekhar Azad
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फारकत नहीं है ? तुम गरीबी का जीवन बिताते हो, यदि तुम मुझे
आजाद का पता बता दो, तो तुम्हें बड़ी सरलता से इनाम के दस हजार
रुपये मिल सकते हैं।"
तिवारी ने साफ इन्कार कर दिया। उसने कहा, "मैं आजाद के
सम्बन्ध में कुछ नहीं जानता।" तिवारी आजाद का घनिष्ठ मित्र था, वह
क्रान्तिकारी नहीं था। पर वह उस पर अधिक विश्वास करते थे। वह
जब भी कानपुर जाते उसके घर अवश्य जाते। उनकी सारी गतिविधियां
का उसे पता रहता था। वह कहां जाते हैं? क्या करते हैं? ये सारी बातें
इसे मालूम रहती थीं। तिवारी के इन्कार कर देने पर इन्स्पेक्टर उसके
पीछे पड़ गया। उसने उसे समझाते हुए कहा— "दस हजार रुपये तुम्हें
इनाम के तो मिलेंगे ही, सरकार कुछ पेंशन भी देगी। तुम और तुम्हारे
बाल-बच्चे सुख से जीवन व्यतीत करेंगे। तुम्हारी वृद्धावस्था आराम से
कटेगी। आजाद एक-न-एक दिन पकड़ में अवश्य आयेंगे ही। फिर व्यर्थ
क्यों हाथ से आये अवसर को खो रहे हो। समझ में कोई कमी कर रहे
हो। बुद्धिमान मनुष्य वही है जो हाथ में आए हुए अवसर का उपयोग
करता है।"