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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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पृष्ठ 358

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( री०स्म ३१४ )
तलबीदने फुरिस्तादने लोरक गुलफरोश रा बरे मैना बा गुल
( लोरकका मालीको बुलाकर फूलके साथ मैनाके पास भेजना )
दिन भा लोरफ मारी बुलाबा । गोवराँ कस हँह पासा जनाबा ॥१
अस बनि रहु धि लोर पठायउ । जो को पूछहि कहसि हाँ आयउँ ॥२
फूल फरँद भरि माली लेतस । फिर फिर गोवरा घर घर देतस ॥३
देख फूल मैनाँ तस रोई । फर मोभरहि जिंहि पिउ होई ॥४
नाँह मोर परदेमहिं छावा । फूल पान महिं देख न भावा ॥५
परकँ हार मलसि, माली साँजरि फूल ।६
पाम लागि सत मैनां, उठ मेमी अब पोल ॥७
टिप्पणी—(१) मारी—माली ।
४४०
( री०स्म ३१५ )
पुरसीदन मैना खर गुल फरोश रा खबर
( मैनाका मालीसे हाल चाल पूछना )
फग्गु मर्टि पारी किंविहुत भारा । फूलबाग म भारक पारा ॥१
जानउँ पग सों राग पठारा । मपन माँज जा दगउँ आपा ॥२
लाग राम मार दिया जुड़ानों । अहग फूल दिउ गरण आनों ॥३
मार नांउ हँ मप दूर गइ । जनु गाँरन मौगहरी दाइ ॥४
गुज्र पर्द मारग हां पाटनैं । मगषी सोद कहों अच पाटउँ ॥५
हरग बिराने गउं, रैन बागर बाह ।६
दायें मागि म दिनउउँ, जा परदगी आह ॥७