चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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१-हिप । २-दैहु । ३-मंदिर । ४-बिसु सुरंग । ५-कै ।
६-सौंभव बात कहत न । ७-सिरजन जाइ सँवर क आवहु । तैस
मनपान करावहु । ८-दोर नीन्द करैमन । ९-दूगर । १०-पुनि ।
टिप्पणी-(१) कम्मर-कंकड़ ।
(६) दाम-ताँबे का सिक्का । सिक्के के इस नाम के सम्बन्ध में
सामान्य धारणा रही है कि उसे पहले पहल अकबर ने प्रवर्तित
किया था । इस कारण अमीर खुसरोके खालिकबारी में 'दाम' के
उल्लेखके प्रमाणसे अनेक विद्वानोंने उसे अकबरकाल अथवा उसके
पश्चात्की रचना सिद्ध करनेकी चेष्टा की है । किन्तु यह नाम
अकबरसे पूर्व भी प्रचलित था । इस उल्लेखके अतिरिक्त
अलाउद्दीन खिलजीके दिल्ली टंकशालके टंकशाली ठक्कुर
फेरूके ग्रन्थ 'द्रव्य परीक्षा' से भी 'दाम' का पूर्व अस्तित्व प्रकट होता
है । द्रव्य-परीक्षाके अनुसार चाँदीका टंक ६ दामके बराबर
होता था । अकबरके समयम रुपयेका मूल्य ४० दाम था । आइन
अकबरीसे ज्ञात होता है कि उस समय चाँदी-सोनेके सिक्कोंके
बावजूद रामदरा सारा हिसाब-किताब दामोंमें ही रखा जाता था ।
सो राय दाम्भ के उपर्युक्त उल्लेखसे भी यह लगता है कि
दिल्ली सुलतानोंके समयम भी लेन देन और व्यवहार में दामका ही
अधिक प्रचलन था ।
देखैहौँ-ढूँढ़ना । बरइ-पैक ।
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( रीफैन्ग्यूग ३ क : बरगई ५५ )
बाज आमदने लोरक बखाना व मुतफक्किर गश्तने चाँदौ अज खबरे मैना
( लोरकका घरके भीतर आना और चाँदॉका मैनाकी बात सुन
कर परेशान होना )
मैनाँ बात जा सिरखन कही । सुनत चाँद राहु जनु गही¹ ॥१
पूनेउँ जस मुख दीपत अहा । गयी सो जोति छीन² होइ रहा ॥२
जब पुरुख अपन³ घर जाइह । सिंह रासि कहँ⁴ गगन चढ़ाइह ॥३
फिर लोर मंदिर महँ आवा । कहा⁵ चाँद चित भमउ परावा ॥४
उठि पानि लै पांइ⁶ पखारहि । तुम्ह बैठ⁷ औ पीर हँकारहि⁸ ॥५