चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
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( री०क्यू० ३ १७ )
बेफियते शिकस्तगीए हाले मैना गोयद
( मैना का दुख एवं कहना )
मैल चीर सिर तेल न जानइ । यह दुख लोरक तोर पखानइ ॥१
फइत सँदेस नैन झरि पानी । बरसहि मेघ जइस घरानी ॥२
बूँदि सरै थाह न पावा । करिया नहीं तीर को लावा ॥३
मैना रूप देख का देखेउँ । अउर रूप सर्वैसार न लेखेउँ ॥४
सब एक दिन फने अहारू । फूँहि पर जियइ जानि करतारू ॥५
रोअस नित कजको मैंन, मैना बिध अस औतारी ।६
नैन मूझि भर आँसु लोरक, तें हीउर माँझ सुतारी ॥७
४३०
( री०क्यू० ३ ७८ : बम्बई १९ )
जारी कर्दने लोरक अज शुनीदने सुखारिये मैना
( मैनाकी दुरवस्था सुन कर लोरकका रोना )
सुनि संताप मैना कर रोवा । लोरक हिये' क कसभर धोवा ॥१
अप' मैना बिनु रही न जाइ । देइ' पँख बिध जौंडै उड़ाइ ॥२
जो न जाइ मैना मुख देखउँ । तो यह जीउँ मरन लँ लेखउँ ॥३
देवस गयउँ निसि आइ तुलानी । यौभन फइत न पात' घटानी ॥४
सिरजन जाइ सीम अन्हयावहि । लँ अपनों फिइँ जेठ फरावहि ॥५
दाम लाख दोइ देउहौं, परद सहस भरावहु ।६
मोर गवन दिन इमरे, तुम फुनि गोहन आवहु ॥७
पाठान्तर—बम्बई प्रति—
शीर्षक-शुनीदन लोरक हाले बेहाकिये मैना व गिरिया कर्दैन बा
दिगरक हाल बाज नमूदन (मैना की दुरवस्था सुन कर लोरकका रोना
और अपनी स्थिति कहना)
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