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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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टिप्पणी—(१) मेख--मेष । रासि—राशि ।
(२) खिरिख—वृष ।
(३) बिरखिक—वृश्चिक ।
(५) मंगर—मगल ।
४२३
( रीकेण्ड्स ३ १ )
ऐजन
( वही )
चौथे बुध सुख कछु आवइ । बिहफइ सोइम राज करावइ ॥१
दूसरे मंगर पाँच परवानी । बइठर पाप धरम कर हानि ॥२
छठयें सनीचर देखि मेरावा । केठे अल्लैनै पुनि हाथ आवा ॥३
राहु केतु भइ आयसु दिलामहिं । मिलैं कुटुंब घर दसमैं आपहिं ॥४
ओ न होइ अस भीठ उतारउँ । गुनित टूट तो पोथा फारउँ ॥५
गंग नीर तुम्ह अन्हउब, दाख बेल फर खाब ।६
पाप तुम्ह सब तज लोरक, गंगा सुद्ध नहाय ॥७
टिप्पणी—(१) बिहफइ—बृहस्पति । सोइम—( फारसी—सोयम ) तीसरा ।
४२४
( रीकेण्ड्स ३ ३८ : बम्बइ १७ )
बजियत सितारगान गोयद
( ग्रह अवस्था कहना )
उसिय समो सब सुख पर आयहु' । पवि परना सब दुख अन्दायहु ॥१
राजा चँदर पाट बेंसारा । महत बिरस्पत सुरुज उमारा ॥२
पंद्रह बिसवा धरम जनावइ । पाप पाँच बायें दिसि पावइ' ॥३
अठ बिसवा दस पूषि मखाने । बारह बिसवा मोर बार आन' ॥४
सतरह बिसवाँ कहौं तू मानी' । बिसवाँ दोइ पाप केउ ज्ञानी ॥५