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चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)

Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary

मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा

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४२१
( रीश्दहूम ३ १ )
बरून आमदने लोरक व मुलाकात करदन बा सिरजन
( लोरकका बाहर आकर सिरजनसे भेंट करना )
लोर बचन सुनि पँवरि सिभारा । पँवरी बैरमन आइ जुहारा ॥१
पीरहि पीर सुनत आँधारी । बेर क्याइ तुम्ह रूपमरारी ॥२
विधि कल्यान पुछि भल पायहु । लउ आँधार सइस अरगामहु ॥३
अन्त गवर जग रास फरै सो । परै पियास खांडे अस ले जो ॥४
रूपवन्त धनवन्त सुलख्खन । सिरीवन्त जजमान विचख्खन ॥५
अमकें बहुतैं असीसा, पीर लोरकहिं दीन्हि ।६
पुन पतरैं चइ बैठउँ सिरजन, पोथि हाथ के लीन्हि ॥७
टिप्पणी—(१) बैरमन—ब्राह्मण ।
(२) पीर—(फारसी) ब्राह्मण । आँधारी—आया ।
(५) सुलख्खन—सुलक्षण । सिरीवन्त—श्रीमन्त । जजमान—यजमान ।
विचख्खन—विचक्षण ।
४२२
( रीश्दहूम ३ २ )
दीदने सिरजन ताल-ए-लोरक व तासीरे सितारगाने साद व नहस
( सिरजनका शुभ अशुभ ग्रहोंको देख कर लोरकका भाग्य बताना )
सेठ अन अवसि बलबारी । मख रासि तुम रूपमरारी ॥१
मेख बिरिख आर मिथुन मँजे । कर्क सिंह कन्या जो गुंजे ॥२
तुला बिरश्चिक धनु आइ सुलावइ । मकर कुम्भ गुन मीन सुनावई ॥३
मेख चँदर जनम पर आवा । विसरें घर सुरुज दिखरावा ॥४
नवमें घरें भय परकासू । सतमें मंगर आइ आबासू ॥५
चार नखत तुम्ह दाहिन, कहीं गुनति अति देखि ।६
मघर बुध विरस्पत, जनम चँदर बिसेसि ॥७