चन्दायन (मुल्ला दाऊद - प्राचीनतम अवधी सूफी-प्रेमाख्यान सटीक)
Chandayan of Mulla Daud with Hindi Commentary
मुल्ला दाऊद (१३७९ ई.) / डॉ. परमेश्वरीलाल गुप्त द्वारा
पृष्ठ 342, कुल 520 में से
संदर्भ में पढ़ें५१२
टिप्पणी—(१) राबसि—रम्य करती है ।
(२) बैल के सीन्हा—बैल बना दिया (मुहावरा) वशीभूत कर दिया ।
४१५
( बम्बई ५१ )
पाये तफ्तादने मैना बज बराये रसीदने पैगाम बेशा नियै लोरक
( लोरकके पास सन्देश ले जाने के निमित्त मैना का पाँव पड़ना )
सिरजन पाडर डैलें मैना । बनिज तुम्हार मोर दुख पैनाँ ॥१
लादि गोंड़ विंहि घरहु गुँसाईं । जिह पाटन गा लोरक सांईं ॥२
जिह पाटन गइ चाँद सुभागी । तिँह पाटन गवनहु महि लागी ॥३
जिह पाटन पिउ रहा लुभाई । लोभी चाँद न लै घर आई ॥४
तिँह पाटन लै बनिज पिसारा । औ बेसहैं कहँ लोर हँकारा ॥५
देतँ तुरी चढ़ि सिरजन, उदरै पवन पँख लाइ ।६
दस गुन लाभ देब मैं तोकइँ, लोर पेसाइँ जाइ ॥७
टिप्पणी—(१) बाडर—पागल । डैलै—डेलती है, डरती है भेजती है । बनिज—
व्यापार सामग्री ।
(२) पाटन—पत्तन बन्दरगाह यहाँ तात्पर्य हरदीपाटनसे है । किन्तु
'बाटन' पाठ भी सम्भव है । उस अवस्था में अर्थ होगा—मार्ग ।
(३) गवनहु—गमन करो बाबा । महि लागी—मर निमित्त; मेरे निहारे ।
(५) बिसार—बिक्रय वस्तु । बेसइ—क्रयके निमित्त ।
(७) देब—दूँगी । तोकइँ—तुमको ।
४१६
(रीफैण्ड्स २११ । बम्बई ७ )
गुफ्तन रोलिन सिरजन नायक रा व रवान कदन
( लोलिनका सिरजन नायकस कहना और उम भेजना )
रोलिन नायक दुन्हु कर गहा । आपुन पीर हियें कै कहा ॥१
रकत हाय अँधरी कँ लइ' । हाँ न लखत टेफ मार गयीं ॥२
पियर धूप अप नीथन मोरा । यह पछताठ रहसि तुम्ह लोरा ॥३